Contact us

नाम

ईमेल *

संदेश *

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

श्री काळभैरवाष्टक

 श्री कालभैरवाष्टकम्

देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं

व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।

नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगम्बरं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥१॥

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं

नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।

कालकालमम्बुजाक्षमक्षशूलमक्षरं


काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥२॥

शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं

श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।

भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥३॥

भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं

भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।

विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥४॥

धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं

कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।

स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥५॥

रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं

नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्।

मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥६॥

अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं

दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।

अष्टसिद्धिदायकं कपाळमालिकाधरं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥७॥

भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं

काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्।

नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥८॥

फलश्रुति

कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरं

ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम्।

शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं

ते प्रयान्ति कालभैरवस्य सन्निधिं ध्रुवम्॥

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

"Comment karne ke liye dhanyavaad. Kripya spam links na bhejein. Aapka comment approval ke baad publish hoga."

आरती खंडेरायाची | श्री खंडोबा महाराजांची संपूर्ण आरती मराठीत

  जय जय खंडेराया। निजशिवरूप सखया। आरती ओवाळीतों। भावभंडारसुप्रिया।। धृ०।। देहत्रय गण थोर। हेचि दुरघट जेजुर। तेथें तूं नांदतोसी। आत्मसाक्षित...