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शुक्रवार, 15 मई 2026

मासिक शिवरात्रि मई 2026 कब है? जानें शुभ मुहूर्त

 

Mahadev Shivratri devotional image

मई 2026 मासिक शिवरात्रि: पूजा मुहूर्त, व्रत विधि, कथा और महत्व-

मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। मई 2026 की छोटी शिवरात्रि पर भक्त व्रत रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा करेंगे। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर महादेव सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।

मई 2026 मासिक शिवरात्रि तिथि और मुहूर्त

मासिक शिवरात्रि तिथि: 15 मई 2026

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 मई सुबह

चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 मई सुबह

निशिता पूजा समय: रात्रि में

शिव पूजा का श्रेष्ठ समय: रात्रि प्रदोष काल

(स्थानीय पंचांग के अनुसार समय थोड़ा बदल सकता है।)

मासिक शिवरात्रि का महत्व

भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है

विवाह और करियर बाधाएँ दूर होती हैं

मानसिक शांति मिलती है

पापों से मुक्ति का मार्ग मिलता है


# पूजा विधि-


सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।

शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएँ।

“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

शिव चालीसा और शिवरात्रि कथा पढ़ें।

#शिवरात्री की कथा -

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक शिकारी रहता था। वह जंगल में जानवरों का शिकार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। एक दिन वह शिकार की तलाश में घने जंगल में गया, लेकिन पूरे दिन उसे कोई शिकार नहीं मिला।

रात होने लगी और जंगल में हिंसक जानवरों का डर बढ़ गया। अपनी रक्षा के लिए वह एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया। उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थापित था, लेकिन शिकारी को इसका पता नहीं था।

रात भर जागते रहने के लिए वह बेलपत्र तोड़कर नीचे गिराता रहा। संयोग से वे बेलपत्र शिवलिंग पर गिरते रहे। उसके हाथ में रखा पानी भी धीरे-धीरे शिवलिंग पर टपकता रहा। इस प्रकार अनजाने में ही भगवान शिव की पूजा होती रही।

उस रात शिकारी ने भोजन भी नहीं किया था, इसलिए उसका व्रत भी हो गया। पूरी रात जागरण करने और बेलपत्र अर्पित होने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए।

सुबह होते ही भगवान शिव ने प्रकट होकर शिकारी को दर्शन दिए और कहा:

“तुम्हारी भक्ति और सरल भाव से मैं प्रसन्न हूँ। तुम्हारे सभी पाप नष्ट हो गए हैं।”

भगवान शिव के आशीर्वाद से शिकारी का जीवन बदल गया और अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

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#शिवरात्रि में क्या चढ़ाएँ

बेलपत्र

धतूरा

भांग

दूध

शहद

गंगाजल

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