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शुक्रवार, 15 मई 2026

पद्मिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व और पारण समय

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की सुंदर Padmini Ekadashi 2026 devotional poster image
Padmini Ekadashi 2026 | भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने वाली पवित्र एकादशी 🙏

पद्मिनी एकादशी 2026 कब है?

वर्ष 2026 में पद्मिनी एकादशी:

           बुधवार, 27 मई 2026

को मनाई जाएगी।

यह एकादशी अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में आने के कारण अत्यंत शुभ मानी जाती है।

 एकादशी तिथि प्रारंभ

26 मई 2026

#सुबह 05:10 बजे से

# एकादशी तिथि समाप्त

27 मई 2026

 सुबह 06:21 बजे तक 


 पद्मिनी एकादशी पारण समय 2026

 पारण की तिथि:

28 मई 2026 (गुरुवार)

पारण समय:

सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक 


#एकादशी व्रत समाप्त करने की प्रक्रिया को पारण कहा जाता है।

यह द्वादशी तिथि में किया जाता है।


पद्मिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व और पारण समय

(Padmini Ekadashi 2026 Date, Vrat Katha, Puja Vidhi in Hindi



पद्मिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व और पारण समय

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षभर आने वाली सभी एकादशियों में पद्मिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यह एकादशी अधिक मास में आती है और भगवान विष्णु को समर्पित होती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पद्मिनी एकादशी का उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इस लेख में हम जानेंगे पद्मिनी एकादशी 2026 की तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा, महत्व और पारण समय के बारे में।


पद्मिनी एकादशी 2026 कब है?

Padmini Ekadashi वर्ष 2026 में अधिक मास के दौरान आने वाली विशेष एकादशी मानी जाएगी।


पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

पद्मिनी एकादशी को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने वाली एकादशी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से:

  • पापों से मुक्ति मिलती है
  • जीवन में सुख-समृद्धि आती है
  • मानसिक शांति प्राप्त होती है
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा मिलती है
  • मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है

यह व्रत विशेष रूप से अधिक मास में आने के कारण और भी अधिक फलदायी माना जाता है।

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पद्मिनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन समय में एक धर्मात्मा राजा थे जिनकी कोई संतान नहीं थी। राजा और रानी दोनों अत्यंत दुखी रहते थे। उन्होंने कई वर्षों तक तप और पूजा की लेकिन उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ।

एक दिन एक महान ऋषि ने रानी को पद्मिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। रानी ने श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु का व्रत और पूजा की। भगवान विष्णु उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें संतान सुख का आशीर्वाद दिया।

इसके बाद राजा का राज्य सुख-समृद्धि से भर गया। तभी से पद्मिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और मनोकामना पूर्ण करने वाली एकादशी माना जाने लगा।


पद्मिनी एकादशी पूजा विधि

1. प्रातः जल्दी उठें

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।


2. पूजा स्थान साफ करें

घर के मंदिर को साफ करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।


3. दीप और धूप जलाएं

घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें।


4. मंत्र जाप करें

भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

5. व्रत कथा पढ़ें

पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।


6. भोग लगाएं

फल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें।


7. रात्रि जागरण

कुछ भक्त रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण भी करते हैं।


पद्मिनी एकादशी व्रत के नियम

  • सात्विक भोजन करें
  • लहसुन-प्याज से बचें
  • क्रोध और झूठ से दूर रहें
  • भगवान विष्णु का ध्यान करें
  • जरूरतमंदों को दान दें

क्या निर्जला व्रत जरूरी है?

नहीं, हर व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत कर सकता है।
कुछ लोग:

  • फलाहार करते हैं
  • कुछ केवल जल ग्रहण करते हैं
  • जबकि कुछ निर्जल व्रत भी रखते हैं।

स्वास्थ्य खराब होने पर कठोर उपवास नहीं करना चाहिए।


पद्मिनी एकादशी और अधिक मास का संबंध

पद्मिनी एकादशी अधिक मास में आती है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।

इस दौरान किए गए:

  • दान
  • जप 
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  • तप
  • व्रत

का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।


पद्मिनी एकादशी पर क्या दान करें?

इस दिन:

  • अन्न दान
  • वस्त्र दान
  • जल दान
  • फल दान

करना शुभ माना जाता है।


पद्मिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

यह व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आत्मशुद्धि का भी प्रतीक माना जाता है। व्रत के माध्यम से व्यक्ति:

  • मन को नियंत्रित करता है
  • सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करता है
  • भगवान के प्रति भक्ति बढ़ाता है

महिलाओं के लिए पद्मिनी एकादशी का महत्व

कई महिलाएं:

  • परिवार की सुख-समृद्धि
  • संतान सुख
  • वैवाहिक सुख
  • घर की शांति

के लिए यह व्रत करती हैं।


पद्मिनी एकादशी पारण कब करें?

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए।


पद्मिनी एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?

  • तामसिक भोजन
  • क्रोध
  • अपशब्द
  • नकारात्मक विचार
  • किसी का अपमान

से बचना चाहिए।

पद्मिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से अधिक मास में आने के कारण बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से व्यक्ति को सुख, शांति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

अगर आप धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन में सकारात्मकता लाना चाहते हैं, तो पद्मिनी एकादशी का व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है।


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