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शनिवार, 20 जून 2026

द्वादश ज्योतिर्लिंगों का परिचय | 12 Jyotirlinga Names and Importance

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का पोस्टर, सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, महाकालेश्वर और अन्य ज्योतिर्लिंग
भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों का दिव्य चित्रण – सोमनाथ से घृष्णेश्वर तक सभी ज्योतिर्लिंगों का धार्मिक महत्व।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों का संक्षिप्त परिचय

सनातन धर्म में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के अनंत ज्योति स्वरूप के प्रतीक हैं। इन बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन से भक्त को शिवकृपा, पापों से मुक्ति तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

1.सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। इसे प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। चंद्रदेव ने यहाँ भगवान शिव की आराधना करके अपने शाप से मुक्ति प्राप्त की थी।

2.मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैल पर्वत पर स्थित है। यह स्थान भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त निवास के रूप में प्रसिद्ध है।

3.महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है और काल के भी स्वामी महाकाल के रूप में पूजित है।

4.ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के मध्य स्थित मंधाता द्वीप पर विराजमान है। यह स्थान ॐ के आकार वाले द्वीप के कारण विशेष महत्व रखता है।

5.केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हिमालय की गोद में उत्तराखंड में स्थित है। यह चारधाम यात्रा का प्रमुख तीर्थ है और अत्यंत कठिन लेकिन पुण्यदायी यात्रा मानी जाती है।

6.भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में स्थित है। मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव ने भीम नामक असुर का वध किया था।

7.काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है। काशी को मोक्षदायिनी नगरी कहा जाता है और स्वयं भगवान शिव इसके रक्षक माने जाते हैं।

8.त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक में स्थित है। गोदावरी नदी का उद्गम स्थल होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

9.वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में स्थित है। यहाँ भगवान शिव वैद्य अर्थात चिकित्सक रूप में भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।

10.नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के द्वारका क्षेत्र में स्थित है। यह नागों और शिवभक्ति से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्ध है।

11.रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु में स्थित है। भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व यहाँ शिवलिंग स्थापित कर पूजा की थी।

12.घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के वेरुल (एलोरा) के निकट स्थित है। यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

इन बारहों ज्योतिर्लिंगों का स्मरण और दर्शन भक्तों को भगवान शिव के निकट ले जाता है। शिवपुराण में वर्णित है कि श्रद्धा और भक्ति से ज्योतिर्लिंगों का पूजन करने वाला भक्त जीवन में सुख, शांति और अंततः मोक्ष प्राप्त करता है।


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द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र-

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालम् ओंकारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घृष्णेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का हिंदी अर्थ-

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालम् ओंकारममलेश्वरम्॥
अर्थ: सौराष्ट्र (गुजरात) में भगवान सोमनाथ, श्रीशैल पर्वत पर मल्लिकार्जुन, उज्जैन में महाकालेश्वर और ओंकार क्षेत्र में ओंकारेश्वर (अमलेश्वर) ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं।

परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
अर्थ: परली (या देवघर) में वैद्यनाथ, डाकिनी प्रदेश में भीमाशंकर, सेतुबंध (रामेश्वरम) में रामेश्वर तथा दारुकावन में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित हैं।

वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घृष्णेशं च शिवालये॥
अर्थ: वाराणसी में विश्वेश्वर (काशी विश्वनाथ), गौतमी नदी (गोदावरी) के तट पर त्र्यंबकेश्वर, हिमालय में केदारनाथ तथा शिवालय में घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं।

एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
अर्थ: जो मनुष्य प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल इन द्वादश ज्योतिर्लिंगों के नामों का श्रद्धापूर्वक स्मरण या पाठ करता है, उसके सात जन्मों के संचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

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भावार्थ
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र भगवान शिव के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों का स्मरण कराता है। शास्त्रों के अनुसार इन ज्योतिर्लिंगों का नाम-जप, दर्शन और स्मरण करने से मनुष्य को पुण्य, शांति, शिवकृपा और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए अनेक शिवभक्त प्रतिदिन इस स्तोत्र का पाठ करते हैं।

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