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सोमवार, 1 जून 2026

3 जून 2026 संकष्टी चतुर्थी: पूजा विधि, महत्व और व्रत

 

3 जून 2026 संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ व्रत तिथि, पूजा विधि, चंद्रोदय समय और महत्व की जानकारी
3 जून 2026 संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की आराधना, व्रत विधि और चंद्रोदय समय से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

3 जून 2026 संकष्टी चतुर्थी: भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का पावन अवसर

संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत और पर्व है। वर्ष 2026 में 3 जून को मनाई जाने वाली संकष्टी चतुर्थी भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है।

संकष्टी चतुर्थी का महत्व

"संकष्टी" शब्द का अर्थ है – संकटों का नाश करने वाली। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से भगवान गणेश भक्तों के सभी कष्टों और बाधाओं को दूर करते हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी आराधना की जाती है।

3 जून 2026 संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व

इस पावन दिन भक्त दिनभर उपवास रखकर भगवान गणेश की पूजा करते हैं। शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से—

  • जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
  • नौकरी और व्यवसाय में सफलता मिलती है।
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है।
  • मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी के दिन निम्नलिखित विधि से पूजा की जा सकती है:

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर और मोदक अर्पित करें।
  4. दीपक और धूप जलाकर आरती करें।
  5. गणेश मंत्रों का जाप करें।
  6. संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें।
  7. रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें।
  8. चंद्रोदय रात्री 9:59pm

संकष्टी चतुर्थी पर मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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व्रत में क्या करें?

  • भगवान गणेश का ध्यान करें।
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • जरूरतमंदों को दान दें।
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • गणेश स्तोत्र और गणेश चालीसा का पाठ करें।

निष्कर्ष

3 जून 2026 की संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना का एक शुभ अवसर है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत एवं पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि आप अपने जीवन में सफलता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं, तो संकष्टी चतुर्थी का व्रत अवश्य करें और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें।

गणपति बप्पा मोरया! 


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