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सोमवार, 15 जून 2026

गुरुपुष्य अमृत योग 18 जून 2026: सफलता और समृद्धि का दुर्लभ संयोग

18 जून 2026 गुरुपुष्य अमृत योग पोस्टर जिसमें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ शुभ समय सुबह 06:04 बजे से 11:32 बजे तक दर्शाया गया है।
18 जून 2026 गुरुपुष्य अमृत योग: सुबह 06:04 बजे से 11:32 बजे तक शुभ कार्य, निवेश, सोना-चांदी खरीदारी और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ समय।


18 जून 2026 गुरुपुष्य अमृत योग का समय

गुरुपुष्य अमृत योग प्रारंभ: प्रातः 06:04 बजे
गुरुपुष्य अमृत योग समाप्त: प्रातः 11:32 बजे

इस अवधि में पूजा-पाठ, मंत्र जाप, सोना-चांदी खरीदना, निवेश करना, नया व्यापार शुरू करना तथा अन्य शुभ कार्य करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरुवार और पुष्य नक्षत्र का यह दुर्लभ संयोग सफलता, समृद्धि और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है।

18 जून 2026 का गुरुपुष्य अमृत योग अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है। यह दिन धन, समृद्धि, शिक्षा, व्यापार, निवेश और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष महत्व रखता है। यदि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा की जाए तथा शुभ कार्य किए जाएं तो जीवन में सुख, शांति और उन्नति प्राप्त होने की मान्यता है।

गुरुपुष्य अमृत योग के अवसर पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करें, दान-पुण्य करें और सकारात्मक संकल्प लेकर अपने जीवन में सफलता और समृद्धि का स्वागत करें।

हिंदू पंचांग और वैदिक ज्योतिष में गुरुपुष्य अमृत योग को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में 18 जून, गुरुवार को यह विशेष योग बन रहा है। यह दिन धन, समृद्धि, व्यापार, निवेश, नई शुरुआत, वाहन एवं आभूषण खरीदने तथा धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों का शुभ फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए अनेक लोग इस दिन सोना-चांदी खरीदते हैं, नए व्यवसाय की शुरुआत करते हैं, निवेश करते हैं और भगवान विष्णु तथा देवगुरु बृहस्पति की पूजा करते हैं।

गुरुपुष्य अमृत योग क्या है?

जब गुरुवार (बृहस्पतिवार) के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बनता है, तब उसे गुरुपुष्य अमृत योग कहा जाता है।

गुरु ग्रह ज्ञान, धन, भाग्य और समृद्धि का कारक है।

पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में सबसे शुभ माना गया है।

इन दोनों का संयोग अमृत समान फल देने वाला माना जाता है।

इसी कारण इस योग को "सर्वसिद्धि प्रदायक" और "अमृत योग" भी कहा जाता है।

18 जून 2026 गुरुपुष्य अमृत योग का महत्व

इस दिन किए गए शुभ कार्य लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह योग व्यक्ति के जीवन में उन्नति, धन लाभ, करियर सफलता और पारिवारिक सुख लाने वाला माना जाता है।

विशेष रूप से यह योग निम्न कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है:

सोना-चांदी खरीदना

नया व्यापार शुरू करना

दुकान या कार्यालय का उद्घाटन

बैंक खाता खोलना

निवेश करना

वाहन खरीदना

भूमि या संपत्ति खरीदना

धार्मिक अनुष्ठान करना

मंत्र दीक्षा लेना

गुरुपुष्य अमृत योग की पौराणिक मान्यता

पुष्य नक्षत्र का संबंध देवताओं के गुरु बृहस्पति से माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस नक्षत्र में देवताओं ने अनेक शुभ कार्य संपन्न किए थे।

मान्यता है कि इस योग में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसलिए इस दिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


  श्री गणेशाय नमः//इंद्र उवाच //

नमस्ते स्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते‌/

शंखचक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते//१//


नमस्ते गरुडारूढे कोलासूर भयंकरी/

सर्वपापहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते//२//


सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्व दृष्टभयंकरि/

सर्वदुःखहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते//३//


सिद्धीबुद्धीप्रदे देवीभुक्तीमुक्ती प्रदायिनी/

मंत्रमूर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते//४//


आद्यंतरहिते देवी आद्यशक्ति महेश्वरी/

योगजे योगसंभूते महालक्ष्मी नमोस्तुते//५//


स्थूल सूक्ष्म महारौद्रे महाशक्ती महोदरे//

महापापहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते//६//


पद्मासनस्थिते देवी परब्रम्ह स्वरूपिणी//

परमेशि जगन्मातरमहालक्ष्मी नमोस्तुते//७//


श्वेतांबरधरे देवी नानालंकार भूषते/

जगतस्थिते जगन्मातरमहालक्ष्मी नमोस्तुते//८//


महालक्ष्म्यष्टकस्तोत्रं य़: पठेत भक्तिमान्नर:/

सर्वसिद्धीमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा//९//


एकाकाले पठेनित्यं महापापविनाशनम/

व्दिकालं य: पठ्ठेन्नित्यं धनधान्य समन्वित://१०//


त्रिकालं य: पठेनित्यं महाशत्रुविनाशनम /

महालक्ष्मीरभवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा//११//


//इतींद्रकृत: श्रीमहालक्ष्म्यष्टकस्तव:  संपूर्ण ://

गुरुपुष्य अमृत योग में क्या खरीदना शुभ माना जाता है?

1. सोना और चांदी

इस दिन सोना-चांदी खरीदना धन वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

2. वाहन

नया वाहन खरीदने के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

3. संपत्ति

घर, प्लॉट या अन्य संपत्ति खरीदने के लिए भी यह उत्तम अवसर माना जाता है।

4. व्यापारिक वस्तुएं

दुकान, उद्योग या व्यवसाय से जुड़ी मशीनरी और उपकरण खरीदना लाभकारी माना जाता है।

5. धार्मिक सामग्री

भगवान की मूर्ति, शंख, पूजा सामग्री और आध्यात्मिक पुस्तकें खरीदना भी शुभ माना जाता है।

गुरुपुष्य अमृत योग में क्या करें?

भगवान विष्णु की पूजा करें

सुबह स्नान करके भगवान विष्णु का पूजन करें और पीले पुष्प अर्पित करें।

देवगुरु बृहस्पति की आराधना करें

बृहस्पति देव की पूजा करने से ज्ञान, सम्मान और आर्थिक उन्नति प्राप्त होती है।

केले के वृक्ष की पूजा

गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की पूजा करना शुभ माना जाता है।

पीली वस्तुओं का दान

हल्दी

चना दाल

पीले वस्त्र

केले

इनका दान करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है।

मंत्र जाप करें

"ॐ बृं बृहस्पतये नमः"

इस मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।

गुरुपुष्य अमृत योग में क्या नहीं करना चाहिए?

किसी का अपमान न करें।

झूठ बोलने से बचें।

क्रोध और विवाद से दूर रहें।

नकारात्मक विचार न रखें।

अनावश्यक खर्च से बचें।

धार्मिक कार्यों की उपेक्षा न करें।

आर्थिक दृष्टि से गुरुपुष्य अमृत योग

ज्योतिष में गुरु ग्रह धन, ज्ञान और भाग्य का कारक माना जाता है। इसलिए इस योग में किया गया निवेश भविष्य में लाभकारी माना जाता है।

बहुत से लोग इस दिन:

SIP शुरू करते हैं

फिक्स्ड डिपॉजिट कराते हैं

बीमा योजनाएं लेते हैं

व्यवसाय में पूंजी निवेश करते हैं

हालांकि किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।

विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व

गुरु ज्ञान और शिक्षा के कारक ग्रह हैं। इसलिए विद्यार्थियों को इस दिन:

सरस्वती वंदना करनी चाहिए।

अध्ययन सामग्री खरीदनी चाहिए।

नई शिक्षा या कोर्स शुरू करना चाहिए।

ऐसा करने से शिक्षा में सफलता मिलने की मान्यता है।

नौकरी और व्यवसाय के लिए लाभकारी

यदि आप नई नौकरी की तलाश में हैं या व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो गुरुपुष्य अमृत योग अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस दिन:

नया व्यवसाय शुरू करें।

व्यापारिक समझौते करें।

नई परियोजना लॉन्च करें।

कार्यालय का उद्घाटन करें।

गृहस्थ जीवन में महत्व

गुरुपुष्य अमृत योग परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है।

परिवार के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

पूजा विधि


प्रातःकाल स्नान करें।

स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।

पूजा स्थल को साफ करें।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।

दीपक जलाएं।

पीले फूल अर्पित करें।

विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

बृहस्पति मंत्र का जाप करें।

आरती करें।

प्रसाद वितरित करें।

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गुरुपुष्य अमृत योग के लाभ

धन वृद्धि

व्यापार में सफलता

नौकरी में उन्नति

शिक्षा में लाभ

पारिवारिक सुख

आध्यात्मिक प्रगति

सकारात्मक ऊर्जा

शुभ कार्यों में सफलता

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