Contact us

नाम

ईमेल *

संदेश *

मंगलवार, 16 जून 2026

योगिनी स्मार्त एकादशी 10 जुलाई 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, पारण समय और धार्मिक महत्व

योगिनी स्मार्त एकादशी 10 जुलाई 2026 पर भगवान विष्णु की दिव्य धार्मिक पोस्टर छवि


योगिनी स्मार्त एकादशी 10 जुलाई 2026 – भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और पुण्य प्राप्ति का पावन दिन।

योगिनी स्मार्त एकादशी 2026

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली योगिनी एकादशी अत्यंत पुण्यदायी और पापों का नाश करने वाली मानी जाती है। वर्ष 2026 में योगिनी स्मार्त एकादशी 10 जुलाई, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु का पूजन करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट होते हैं तथा उसे सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


योगिनी स्मार्त एकादशी 2026 तिथि

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 9 जुलाई 2026
  • एकादशी तिथि समाप्त: 10 जुलाई 2026
  • स्मार्त योगिनी एकादशी व्रत: 10 जुलाई 2026, शुक्रवार
  • पारण: 11 जुलाई 2026

योगिनी एकादशी का महत्व

योगिनी एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस व्रत का फल हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने और अनेक यज्ञों के समान बताया गया है।

इस दिन व्रत रखने से:

  • पापों का नाश होता है।
  • रोग और कष्ट दूर होते हैं।
  • आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है।
  • परिवार में सुख-शांति आती है।
  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

योगिनी एकादशी पूजा विधि

1. प्रातः स्नान करें

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।

3. पूजा स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

4. भगवान विष्णु का पूजन करें

  • दीपक जलाएं।
  • धूप अर्पित करें।
  • पीले फूल चढ़ाएं।
  • तुलसी दल अर्पित करें।
  • फल और नैवेद्य अर्पित करें।

5. मंत्र जाप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

या

ॐ विष्णवे नमः

मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

6. एकादशी कथा सुनें

योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।

7. रात्रि जागरण

संभव हो तो भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें।


योगिनी एकादशी व्रत में क्या खाएं?

व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें।

खा सकते हैं:

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • मूंगफली
  • सिंघाड़े का आटा
  • कुट्टू का आटा

नहीं खाना चाहिए:

  • चावल
  • गेहूं
  • दालें
  • प्याज
  • लहसुन
  • मांसाहार
  • शराब

योगिनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में कुबेर के पुष्पवन की देखभाल हेममाली नामक यक्ष करता था। उसका कार्य भगवान शिव की पूजा के लिए प्रतिदिन पुष्प पहुंचाना था।

एक दिन वह अपनी पत्नी के प्रेम में इतना मग्न हो गया कि समय पर फूल नहीं पहुंचा सका। इससे कुबेर अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने हेममाली को कोढ़ी होने का शाप दे दिया।

शाप के कारण हेममाली पृथ्वी पर भटकने लगा और अत्यंत कष्ट भोगने लगा। एक दिन उसे महान ऋषि मार्कण्डेय मिले। उन्होंने उसकी पीड़ा सुनकर योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

हेममाली ने श्रद्धा से योगिनी एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उसका शाप समाप्त हो गया और उसे पुनः अपना दिव्य स्वरूप प्राप्त हो गया।

तभी से योगिनी एकादशी को पापों और दुखों का नाश करने वाली एकादशी माना जाता है।


भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के उपाय

योगिनी एकादशी के दिन:

  • तुलसी पर जल अर्पित करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • पीले वस्त्र दान करें।
  • गरीबों को भोजन कराएं।
  • गौ सेवा करें।
  • मंदिर में दीपदान करें।

इन उपायों से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


योगिनी एकादशी पर दान का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान कई गुना फल प्रदान करता है।

दान की वस्तुएं:

  • अन्न
  • वस्त्र
  • फल
  • जल
  • छाता
  • गुड़
  • दक्षिणा

दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।


योगिनी एकादशी और आध्यात्मिक लाभ

यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मशुद्धि का माध्यम भी है।

व्रत रखने से:

  • मन शांत होता है।
  • नकारात्मक विचार कम होते हैं।
  • आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • भगवान के प्रति भक्ति बढ़ती है।

व्रत पारण विधि

अगले दिन द्वादशी तिथि में स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें।

  • तुलसी युक्त जल अर्पित करें।
  • भगवान को भोग लगाएं।
  • ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं।
  • इसके बाद पारण करें।

सही समय पर पारण करना व्रत का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है

योगिनी स्मार्त एकादशी 10 जुलाई 2026 भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर है। यह व्रत मनुष्य को पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक किया गया योगिनी एकादशी व्रत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

भगवान विष्णु सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें।

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ॥

#तुळसी माला यहाँ से खरीदें 👇 

https://amzn.to/4xypLLG


यह भी पढ़ें

✅ संकष्टी चतुर्थी 3 जुलाई 2026: व्रत, पूजा विधि और चंद्र दर्शन

✅ सोमवती अमावस्या 15 जून 2026: पिंडदान, स्नान और दान का महत्व

✅ प्रदोष व्रत 12 जून 2026: भगवान शिव की कृपा पाने का शुभ अवसर

✅ मासिक शिवरात्रि 13 जून 2026: पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा

✅ सत्य गणपति नांदेड़ का इतिहास और धार्मिक महत्व

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

"Comment karne ke liye dhanyavaad. Kripya spam links na bhejein. Aapka comment approval ke baad publish hoga."

श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्याय और 18 जीवन बदलने वाले संदेश

  श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्याय – 18 जीवन बदलने वाले संदेश श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्याय अगर हम जीवन में उतारे तो हर क्षेत्र में कामयाब होने...