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बुधवार, 1 अप्रैल 2026

हनुमानजी जयंती 2 एप्रिल 2026 , हनुमान चालीसा अर्थसहित




हनुमान जयंती भगवान श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। हनुमान जी शक्ति, भक्ति, साहस और सेवा के प्रतीक माने जाते हैं।

महाराष्ट्र सहित भारत के अधिकांश भागों में वर्ष 2026 में हनुमान जयंती 2 अप्रैल (गुरुवार) को मनाई जाएगी। यह चैत्र पूर्णिमा के दिन आती है।

इस दिन भक्त भगवान हनुमान से शक्ति, भय से मुक्ति, सफलता, स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। लोग मंदिर जाते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, व्रत रखते हैं, सिंदूर, फूल और लड्डू अर्पित करते हैं तथा सुबह-शाम आरती करते हैं।




घर पर सरल पूजा करने के लिए आप दीपक जलाएँ, गुड़ और केले अर्पित करें 🍌, “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें और श्रद्धा से हनुमान चालीसा पढ़ें।

अब नीचे हनुमान चालीसा हिन्दी में संक्षिप्त अर्थ सहित दिया गया है:

दोहा

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

अर्थ: गुरु के चरणों की धूल से मन को शुद्ध करके श्रीराम के यश का वर्णन करता हूँ जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देते हैं।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

अर्थ: हनुमान जी ज्ञान और गुणों के सागर हैं, तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।

राम दूत अतुलित बल धामा।

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥

अर्थ: आप श्रीराम के दूत और अपार बल के धाम हैं।

महाबीर विक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी॥

अर्थ: आप पराक्रमी हैं और बुरी बुद्धि को दूर करके अच्छी बुद्धि देते हैं।

कंचन वरन विराज सुबेसा।

कानन कुंडल कुंचित केसा॥

अर्थ: आपका शरीर स्वर्ण जैसा तेजस्वी है और सुंदर रूप है।

हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे।

काँधे मूँज जनेऊ साजे॥

अर्थ: हाथ में वज्र और ध्वजा सुशोभित हैं।

शंकर सुवन केसरी नंदन।

तेज प्रताप महा जग वंदन॥

अर्थ: आप शिव के अंश और केसरी के पुत्र हैं, आपका तेज संसार पूजता है।

(आगे की चौपाइयों का अर्थ भी इसी प्रकार — संक्षेप में)

विद्यावान गुनी अति चातुर।

राम काज करिबे को आतुर॥

अर्थ: आप विद्वान हैं और हमेशा श्रीराम की सेवा को तत्पर रहते हैं।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

राम लखन सीता मन बसिया॥

अर्थ: आप राम कथा सुनना पसंद करते हैं और आपके मन में राम-सीता-लक्ष्मण बसे हैं।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

विकट रूप धरि लंक जरावा॥

अर्थ: आपने सीता माता को सूक्ष्म रूप में दर्शन दिए और लंका जलायी।

भीम रूप धरि असुर सँहारे।

रामचंद्र के काज सँवारे॥

अर्थ: आपने राक्षसों का नाश किया और राम का कार्य पूरा किया।

लाय संजीवन लखन जियाए।

श्रीरघुवीर हरषि उर लाए॥

अर्थ: संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी का जीवन बचाया।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥

अर्थ: श्रीराम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और आपको भरत समान प्रिय कहा।

(शेष चौपाइयों का सार)

हनुमान जी भक्तों के संकट दूर करते हैं, बुद्धि-बल देते हैं, रोग दूर करते हैं, भय समाप्त करते हैं और सच्चे भक्त की रक्षा करते हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा से हनुमान चालीसा पढ़ता है, उसके जीवन में साहस, शांति और सफलता आती है।

अंतिम दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

अर्थ: हे पवनपुत्र! आप संकट दूर करने वाले और मंगलमूर्ति हैं, कृपया राम-सीता-लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास करें।


                              मारुति स्तोत्र


भीमरूपी महारुद्रा, वज्र हनुमान मारुती।

वनारी अंजनीसूता, रामदूता प्रभंजना॥

महाबली प्राणदाता, सकळां उठवी बळे।

सौख्यकारी दुःखहारी, धूर्त वैष्णव गायक॥

दीननाथा हरिरूपा, सुंदरा जगदंतरा।

पाताळदेवताहंता, भव्य सिंदूरलेपना॥

लोकनाथा जगन्नाथा, प्राणनाथा पुरातना।

पुण्यवंता पुण्यशीला, पावना परितोषका॥

ध्वजांगे उचलली बाहो, आवेशे लोटला पुढे।

काळाग्नी काळरुद्राग्नी, देखतां कांपती भये॥

ब्रह्मांडे माळा नेणो, आवळे दंतपंगती।

नेत्राग्नी चालिल्या ज्वाळा, भ्रुकुटी ताठिल्या बळी॥

पुच्छ ते मुरडिले माथा, किरीटी कुंडले परी।

सुवर्णकटि कासोटी, घंटा किंकिणी नागरा॥

ठकारे पर्वता जैसा, नेटका सडपातळू।

चपळांग पाहतां मोठा, महाविद्युल्लते परी॥

कोटिच्या कोटि उड्डाणे, झेपावे उत्तरेकडे।

मंदाद्रीसारिखा द्रोणू, क्रोधे उत्पाटिला बळे॥

आणिला मागुती नेला, आला गेला मनोगती।

मनासी टाकिले मागे, गतिसी तुळणा नसे॥

अणुपासोनि ब्रह्मांडाएवढा होत जातसे।

तयासी तुळणा कोठे, मेरुमंदार धाकुटे॥

ब्रह्मांडाभोवती वेढे, वज्रपुच्छे करू शके।

तयासी तुळणा कैसी, ब्रह्मांडी पाहतां नसे॥

आरक्त देखिले डोळे, ग्रासिले सूर्यमंडळा।

वाढता वाढता वाढे, भेदिले शून्यमंडळा॥

धनधान्य पशुवृद्धी, पुत्रपौत्र समृद्धी दे।

पावती रूपविद्यादि, स्तोत्रपाठे करुनिया॥

भूतप्रेत समंधादि, रोगव्याधी समस्तही।

नासती तुटती चिंता, आनंदे भीमदर्शने॥

देह धरा पंधरा काळी, लाभली शोभली बरी।

दृढदेहो निसंदेहो, संख्या चंद्रकळागुणे॥

रामदासी अग्रगण्यु, कपीकुळासी मंडणू।

रामरूपी अंतरात्मा, दर्शने दोष नासती॥

संक्षिप्त अर्थ 

इस स्तोत्र में श्री हनुमान (मारुति) जी के भीषण पराक्रम, तेज, गति, बल, और भक्तों की रक्षा करने वाले स्वरूप का वर्णन है। इसका नियमित पाठ करने से:

भय दूर होता है 

आत्मबल बढ़ता है 

रोग-बाधाएँ कम होती हैं

नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है

घर में सुख-समृद्धि आती है 




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