![]() |
अपरा एकादशी 13 मई, बुधवार को मनाई जाएगी। यह व्रत वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आता है और भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
👉धार्मिक महत्त्व -
अपरा एकादशी हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत से की प्राप्ति होती है। इसे “अचला एकादशी” भी कहा जाता है। अपरा एकादशी का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी मानी जाती है
इस व्रत का फल गंगा स्नान, दान और यज्ञ के समान माना जाता है।
👉 पूजा विधी -
स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
घर के मंदिर में दीप जलाएं और भगवान विष्णु की पूजा करने
के बाद फल, फूल, तुलसी दल और प्रसाद अर्पित करें।
दिनभर व्रत रखें (निर्जल या फलाहार)।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
शाम को आरती करें और अगले दिन व्रत पारण करें।
👉 वर्जित अन्न -
चावल, गेहूं, दालें
लहसुन, प्याज
👉 क्या खाये
फल, दूध, दही
साबूदाना, सिंघाड़ा आटा
आलू से बने व्यंजन
👉व्रत के लाभ
पापों से मुक्ति
मानसिक शांति
धन और सुख-समृद्धि
जीवन में सकारात्मक ऊर्जा
👉अपरा एकादशी व्रत कथा-
अपरा एकादशी व्रत कथा -
अपरा एकादशी को अचला एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत भगवान भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे करने से बड़े-बड़े पापों का नाश होता है।
प्राचीन समय में राजा महिध्वज नाम के एक धर्मात्मा और दयालु राजा थे। वे अपने राज्य में न्याय और धर्म के अनुसार शासन करते थे। उनकी प्रजा बहुत सुखी थी।
लेकिन उनके छोटे भाई वज्रध्वज को उनसे ईर्ष्या थी। वह चाहता था कि वह स्वयं राजा बन जाए।
एक दिन अवसर देखकर वज्रध्वज ने अपने ही बड़े भाई राजा महिध्वज की हत्या कर दी। उसने राजा के शव को जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया।
इस अधर्म के कारण राजा महिध्वज की आत्मा को शांति नहीं मिली और वह उसी पेड़ पर प्रेत (भूत) बनकर भटकने लगी।
ऋषि का आगमन
कुछ समय बाद उस जंगल में ऋषि धौम्य का आगमन हुआ। उन्होंने अपने तपोबल से उस प्रेत को देखा और उसकी पीड़ा समझी।
राजा महिध्वज की आत्मा ने ऋषि से अपनी दुःखभरी कथा सुनाई और मुक्ति का मार्ग पूछा।
https://www.amazon.in/shop/anviik/list/286FIFO77FA4X?ref_=aipsflist
व्रत का उपाय
ऋषि धौम्य ने कहा:
“तुम्हारे उद्धार के लिए मैं अपरा एकादशी व्रत करूंगा और उसका पुण्य तुम्हें समर्पित करूंगा।”
ऋषि ने विधिपूर्वक अपरा एकादशी का व्रत किया, भगवान विष्णु की पूजा की और व्रत का फल राजा की आत्मा को अर्पित कर दिया।
व्रत के प्रभाव से राजा महिध्वज को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई और उन्हें स्वर्ग लोक की प्राप्त होता है
अपरा एकादशी व्रत का महत्व -
यह व्रत गंभीर पापों को भी नष्ट करता है
व्यक्ति को मोक्ष और स्वर्ग की प्राप्ति कराता है
धन, सुख और शांति प्रदान करता है
जीवन में किए गए पापों का प्रायश्चित करता है
शास्त्रों के अनुसार इसका फल तीर्थ स्नान, दान और यज्ञ से भी अधिक होता है।
श्रद्धा और भक्ति से अपरा एकादशी व्रत करना मतलब भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होना है!
यह व्रत करणे से सभी कष्ट भी दूर होते है!

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
"Comment karne ke liye dhanyavaad. Kripya spam links na bhejein. Aapka comment approval ke baad publish hoga."